रविवार, 10 मई 2026

वो कहना है, जो रह गया ...

रोज़मर्रा की भाग - दौड़ में,

कुछ कहना भूल जाता हूँ ,

मैं अपनी ही परेशानियों में,

कहीं गुम हो जाता हूँ। 

तुम पूछती हो हाल मेरा,

मैं 'ठीक हूँ' कहता हूँ,

पर तेरी आँचल की छाँव में,

मैं आज भी सुकून पाता हूँ। 


कभी काम का बोझ होता है,

कभी दुनिया का शोर 

मेरी मजबूत शख्सियत में, 

छिपा है एक कमजोर छोर। 

वो डांट तुम्हारी बुरी लगी,

कभी गुस्से में मैं बोल गया,

पर सच ये है माँ,

तेरी ममता ने मुझे विभोर किया। 


तुम्हारी आँखों की वो फिक्र,

जो थक कर भी नहीं सोती,

मेरे लिए वो दुआएं,

जो कभी कम नहीं होती। 

शुक्रिया कहना छोटा है 

शायद लफ्ज़ भी कम पड़ जाएँ। 

बस इतना समझ लो माँ, 

तुम बिन हम बिखर गयें जाएँ। 


कभी बैठूं तेरी गोद में 

सिर सहला देना वैसे ही 

कहना बहुत है, जो कह ना पाऊँ 

भाव पढ़ मुझे समझ लेना वैसे ही। 


मैं बड़ा हो गया हूँ शायद ,

या ऐसा लोग कहते हैं

पर तेरे सामने आते हीं 

मेरे सारे मुखौटे गिर जाते हैं। 

बाहर की दुनिया में मैं 

चाहे कितना भी लड़ लूँ माँ 

पर घर आते हीं तेरी एक आवाज़ से,

सारे विषाद भर जाते हैं। 


तुम बिन कहे पढ़ लेती हो 

मेरी हर एक ख़ामोशी 

तुम ढाल बन खड़ी मिलती हो 

जब किस्मत होती खोटी। 

मैं जज़्बातों को कागज़ पर,

उतरना तो सीख गया,

पर तेरी ममता का एक अंश भी 

लिख पाना मुमकिन नहीं।


तेरी साड़ी के पल्लू से,

पसीना पोंछने याद है मुझे,

तेरी ऊँगली पकड़ कर,

मेला घूमना याद है मुझे। 

आज भी जब गिरता हूँ,

मुँह से माँ ही निकलता है,

दुनिया की हर भीड़ में, 

तुझे याद कर हीं संभलता हूँ। 


माँ, कभी - कभी सोचता हूँ,

कि अगर तू न होती,

तो मैं इस बेरंग दुनिया में,

कहाँ ठिकाना पाता!

मेरी हर जीत पर जो तूने 

शिद्दत से नज़र उतारी है,

उसी दुआ के दम पर, 

मैं हर बार संभल जाता। 


अजीब है ना ...

मैं पूरी दुनिया को,

अपनी काबिलियत दिखाता हूँ,

मगर तेरी गोद में बैठते ही,

फिर से छोटा बच्चा बन जाता हूँ। 

तू बूढ़ी हो रही है या,

मेरी आँखें अब गौर से देखने लगी हैं,

तेरे चेहरे की हर हर झुर्रियों में,

मेरी परवरिश की कहानियाँ लिखी है। 


तेरी परछाई भी रहे सलामत 

जब तक ये सांसें चले 

जो कम बड़े समय तो,

माँ, मेरी उमर भी तुझे लगे। 

अगले जन्म में भी माँ,

तेरा ही बेटा बन कर आऊँ 

 जो कसर इस बार रह गयी,

उसे जी भर कर निभाऊँ।  


माफ़ कर देना माँ,

मेरी तमाम खामोशियाँ और गलतियां,

तेरा ये 'अमितेश' आज भी,

बस तेरे ही प्यार के लिए जीता। 



- अमितेश   

 



 



 

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