ज़मी से फ़लक तक, बस तेरा ही नूर है,
तेरी बाहों में आकर मिलता, दिल को जो सुकून है।
न कोई बंदिश है अब, न कोई दुनिया का डर,
मेरी रूह में समाया, बस तेरा ही फितूर है।
धड़कनें जब मिलती हैं, तो वक़्त ठहर जाता है,
तेरी आँखों के समंदर में, ये दिल उतर जाता है।
तेरी छुअन से फिज़ाओं में इत्र घुल जाता है,
तेरी सुनहरी मुस्कान से, मेरा हर ज़ख्म भर जाता है।
लबों की ख़ामोशी में भी, हज़ारों बातें होती है,
सिर्फ तेरे ख़यालों में ही, अब मेरी रातें होती हैं।
बेपनाह है ये चाहत, इसकी नहीं,
जहाँ तुम साथ होती हो मेरे, वहीं मेरी इबादतें होती है।
तेरी धड़कनों को अपनी, सांसों में बसा लूं मैं,
चाहत है ये कि तुझे खुद में छुपा लूं मैं।
सिर्फ एक जन्म नहीं, जन्म - जन्मांतर की दुआ हो तुम,
अपनी सारी उम्र, अब तेरे नाम करा लूं मैं।
- अमितेश
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