गुरुवार, 14 मई 2026

आईना

अक्स दर अक्स बदलता, पुराना याद नहीं रखता,
ये आईना किसी का फ़साना याद नहीं रखता। 
इसे बस "अभी" की ज़िद है, यही पल हक़ीक़त है,
गया जो वक़्त, वो गुजरा ज़माना याद नहीं रखता। 

इसे कहाँ खबर, कल की सुबह सुनहरी होगी,
ये कोरा कांच, ख्वाबों का ठिकाना याद नहीं रखता। 
तुम्हारी आँखों में जो कल का अंदेशा है, या बीता ग़म,
ये वो लकीरें, वो दर्द का निशां याद नहीं रखता। 

ये 'हाल' का शायर है, 'माज़ी' से वाकिफ़ नहीं, 
किसी का पुराना दोस्ताना याद नहीं रखता। 
तू ढूंढता है इसमें अपनी यादों के सुनहरे पन्ने,
मगर ये बे - मुरव्वत, दिल का खज़ाना याद नहीं रखता। 

मिटा देता है पल भर में हर एक तस्वीर को अपनी 
मुसाफ़िर लौट आये तो, चेहरा पुराना याद नहीं रखता। 
अमितेश, तू अपनी यादों को दिल की तिजोरी में सजा 
ये आईना  है,तेरे कल का अफ़साना याद नहीं रखता। 

इस बेख़बरी में भी एक बा - ख़बर राज़ है जानी,
आईना यादों की धूल पर अपना आज नहीं रखता। 
तेरी यादें नफ़ीस हो या हालत - ए - ज़बू 
ये फ़राख़ दिल आईना, पुराना तसव्वुर याद नहीं रखता। 

# फ़राख़ दिल - बड़ा दिल 
# कल्ब  - दिल 
# तसव्वुर - Imagination / Visualization 
# माज़ी - अतीत 
# नफ़ीस - शुद्ध / बेहद सुन्दर 
# बे - मुरव्वत - जिसमे लिहाज़ ना हो 
# हालत - ए - ज़बू - बदहाली 


- अमितेश 

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