गुरुवार, 4 जून 2026

एक कप Imperfection

विक्रम और अवंतिका आज के affluent couple थे। हाड़ तोड़ मेहनत कर के अपना एक मुकाम बनाया था। 15 साल लंदन में रह कर आये थे। खूब पैसा कमाया था। जानते थे की हिंदुस्तान में लंदन नहीं मिलेगा फिर भी यहाँ शिफ्ट कर गए थे। पैसे तो यहाँ भी दोनों बहुत ही अच्छा कमा रहे थे। 

विक्रम एक मल्टीनेशनल Hedge - Fund कंपनी में Senior Analyst था। उसकी बीबी अवंतिका दुनिया की जानी मानी Art Curator थी। दोनों ही new age business में थे तो दौलत भी बढ़ती जा रही थी उनकी। गुडगाँव की एक नफीस सी जगह पर 10 करोड़ का पेंटहाउस ख़रीदा था। यही उनका आशियाना था। 

उनकी सुबह उनके स्मार्ट होम के Ambient Wake Up अलार्म से होती थी। 7 बजते ही उनकी पेंटहाउस के automatic पर्दे धीरे से खुल जाते और बैकग्राउंड में बहुत ही धीमा, क्लासिकल जैज़ म्यूज़िक बजने लगता। अवंतिका अपने Carine Gilson के नाईट गाउन को संभालते हुए Ethiopian Roast Coffee Beans को खुद grind करती और एक बेहतरीन कॉफ़ी बनाती महंगी कॉफ़ी मशीन में। वहीं विक्रम Morning Breakfast के लिए आर्गेनिक अवोकार्डो टोस्ट और soaked चिआ सीड्स की प्लेट सजा रहा होता। 

दोनों अपने आलिशान बंगले के गार्डन में महंगे पौधों के बीच अपनी महंगी जिंदगी जी रहे थे। उनकी बातचीत में हिंदी के शब्द उतने ही होते जितने उनकी डाइट में कार्बोहाइड्रेट्स। जिंदगी खुशहाल थी और दोनों एक दूसरे से बेहद खुश थे। यही उन्होंने चाहा भी अपनी जिंदगी से। 

"विक्रम, आज शाम को मिस्टर एंड मिसेस रायचूरकर के साथ हमारा डिनर "The Vintage Hall - Taj" में है। प्लीज समय पर आ जाना। And yes, don't forget to wear that TAG Heuer Signature Carrera Model watch, ये मुझे बहुत पसंद है।" अवंतिका ने अपने iPad पर अपना शेड्यूल चेक करते हुए कहा। 

"Don't Worry Babes, I will ensure looking best for you this evening, बस देख लेना मिसेस रायचूरकर को मुझपे Crush ना हो जाये?" विक्रम ने आँखों में शरारत भरते हुए कहा। 

एक हलकी हंसी तैर गयी उस सुहाने बाग़ में। 

कुछ ऐसे ही उनकी जिंदगी नपी तुली ख़ुशी, सोफिस्टिकेटेड हंसी और नफीस प्यार के साथ गुजर रही थी। 


शाम को दोनों अपनी मर्सिडीज-बेन्ज से डिनर के लिए निकले। दिल्ली की बारिश के बाद मौसम सुहाना था, लेकिन सड़कों पर ट्रैफिक का बुरा हाल था।

अचानक, एक चौराहे पर उनकी गाड़ी के आगे एक ऑटो रिक्शा बंद हो गया। विक्रम ने थोड़ा झल्लाकर हॉर्न बजाया। अवंतिका ने धीरे से कहा, "काम डाउन विक्रम, इट्स सो अनप्रोफेशनल टू हॉंक लाइक दैट।"

तभी सड़क के किनारे, एक पुरानी नीम के पेड़ के नीचे बनी एक छोटी सी टपरी पर विक्रम की नज़र गई। वहां तिरपाल के नीचे एक कोयले की भट्टी सुलग रही थी। मिट्टी के कुल्हड़ों से भाप निकल रही थी। बारिश की बूंदें गरम तवे पर गिरकर छन-छन की आवाज कर रही थीं।

वहां कुछ 'साधारण लोग' एक साथ खड़े होकर कुल्हड़ की चाय हाथ में लिए किसी बात पर हंस रहे थे। एक लड़का जोर-जोर से हंसते हुए अपने दोस्त के कंधे पर हाथ मार रहा था। वहां कोई मैनर्स नहीं थे, कोई क्लासिकल जैज़ नहीं था, लेकिन वहां एक ऐसी चीज़ थी जो विक्रम और अवंतिका के लिविंग रूम में अक्सर गायब रहती थी - बेपरवाह, बेसाख्ता जिंदगी।

पता नहीं क्यों विक्रम ने गाड़ी को साइड में रोका। ये उस नीम के पेड़ के नीचे की टपरी से कुछ पहले था। 

"व्हाट आर यू डूइंग विक्रम? वी आर गेटिंग लेट," अवंतिका ने अपनी रोलेक्स में अपनी कीमती समय को देखते हुए कहा।

"अवंतिका, हमने आखिरी बार बिना किसी एजेंडे के, बिना किसी बिजनेस टॉक के, सिर्फ एक-दूसरे के साथ हंसते हुए वक्त कब बिताया था?" विक्रम ने अवंतिका की आंखों में देखते हुए पूछा।

अवंतिका चुप हो गई। उसके पास इस बात का कोई सोफिस्टिकेटेड जवाब नहीं था।

"चलो, आज कुछ ऐसा करते हैं जो हमारे 'स्टेटस' को सूट नहीं करता," विक्रम ने मुस्कुराते हुए कहा।

दोनों गाड़ी से नीचे उतरे। अवंतिका ने अपनी सैंडल्स को कीचड़ से बचाते हुए टपरी की तरफ कदम बढ़ाए। टपरी वाले ने दो आलीशान कपड़े पहने लोगों को देखकर फौरन स्टूल साफ किया।

"भैया, दो कड़क कुल्हड़ चाय देना। अदरक वाली, "विक्रम ने पहली बार अंग्रेजी लहजा छोड़कर बिल्कुल देसी अंदाज में कहा।

जब गरम मिट्टी का कुल्हड़ अवंतिका के मैनीक्योर किए हुए हाथों में आया, तो पहले तो उसे थोड़ा अजीब लगा। लेकिन जैसे ही उसने पहला घूंट लिया, उसकी आंखें बंद हो गईं। अदरक, इलायची और मिट्टी की वो सोंधी खुशबू... जो किसी फाइव-स्टार होटल की कस्टमाइज्ड Chamomile Tea में कभी नहीं मिल सकती थी।

पास खड़े लोग किसी चुटकुले पर जोर से हंसे, तो इस बार अवंतिका ने नाक नहीं सिकोड़ी। बल्कि उसकी होंठों पर भी एक असली, बिना किसी बनावट वाली मुस्कान आ गई।

विक्रम ने अवंतिका का हाथ पकड़ा। दोनों ने बिना कुछ कहे, सिर्फ चाय की चुस्कियों और बारिश की आवाज़ के बीच बीस मिनट बिता दिए। कोई फोन नहीं देखा गया, कोई शेड्यूल री-चेक नहीं हुआ।

गाड़ी में वापस बैठते हुए अवंतिका ने कहा, "यू नो विक्रम, कभी-कभी बहुत ज्यादा परफेक्ट होने की कोशिश में, हम जीना ही भूल जाते हैं।"

विक्रम ने गाड़ी स्टार्ट की और मुस्कुराया, "तो फिर तय रहा। हर संडे, हमारी सोफिस्टिकेटेड क्रॉकरी को थोड़ा आराम मिलेगा, और हम अपनी औकात से बाहर जाकर... थोड़ी जिंदगी पिएंगे।"

उस रात, मिस्टर एंड मिसेस रायचूरकर के साथ महंगी वाइन पीते हुए भी, विक्रम और अवंतिका के जेहन में उस मिट्टी के कुल्हड़ का स्वाद और उसकी सादगी बनी रही। उन्हें कहीं ये समझ में आ रहा था कि जिंदगी में थोड़ा Imperfection उसे और रोमांचक बना देते हैं। वे समझ रहे थे की जहाँ से उठ कर यहाँ पहुंचे थे, कभी - कभी वहां वापस जाना आपको खुद से, अपने अतीत से जुड़ने में मदद ही करता है।   


- अमितेश 


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