वह ज़रा सी उलझी, ज़रा सी साफ़ है,
बड़ी अजीब लड़की है, खुदा का इंसाफ़ है।
उसकी आँखों में समंदर है, मगर प्यास भी है,
हँसती है तो लगती है जैसे, कोई पुरानी आस है।
बड़ी अजीब लड़की है,
वो कभी तेज़ हवाओं सी बहती है,
तो कभी ठहरे पानी सी शांत रहती है।
बातों-बातों में दुनिया जीत लेती है,
और तनहाइयों में खुद से ही डरती है।
बड़ी अजीब लड़की है,
उसका होना, न होना, किसी पहेली सा है,
उसका चुप रहना भी, किसी राग-रागिनी सा है।
वो अपनी ही दुनिया की रचयिता है,
जिसमें हकीकत कम और ख्वाबों का रेला है।
बड़ी अजीब लड़की है,
कभी वो चाँद की रौशनी को छूना चाहती है,
तो कभी अपनी परछाईं से ही मुख मोड़ लेती है।
ज़िद उसकी ऐसी कि पत्थर पिघला दे,
और नाज़ुक इतनी कि एक लफ्ज़ पर टूट जाती है।
सब कहते हैं उसे, कि बदल जाना चाहिए,
वक्त के साथ खुद को ढाल लेना चाहिए।
पर वो जो है, उसे वही बनकर रहना है,
अपनी शर्तों पर जीने का उसे जुनून सहना है।
बड़ी अजीब लड़की है,
वो किसी की समझ में नहीं आती,
जैसे किताब हो कोई, जिसे बस पढ़ना है,
मगर जिसका कोई भी पन्ना पूरा नहीं होता।
वो ज़रा सी नादान, ज़रा सी समझदार है,
उसकी खामोशियों में छिपा एक अजब सा प्यार है।
लोग पूछते हैं, "कौन है वो? क्या है वो?"
मैं बस मुस्कुरा देता हूँ,
वो कोई ख्वाब, या बस एक एहसास है...
बड़ी अजीब लड़की है, पर बहुत ही खास है।
- अमितेश
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