रात कितनी भी घनी हो, सुबह की आस मत खोना,
वक़्त कैसा भी कठिन हो, तुम हताश मत होना।
पग - पग पर चुभते शूल, एक दिन फूल बन जाएंगे,
रख हौसला, हूँ मैं साथ तेरे, सारे कष्ट मिट जाएंगे।
धैर्य की पतवार थामें, लहरों से तुम लड़ते जाओ,
चोट खा कर भी मुसाफिर, आगे ही तुम बढ़ते जाओ।
काले बादल जो घिरे हैं, मेरी धूप से छंट जाएँगे,
रख हौसला, हूँ मैं साथ तेरे, सारे कष्ट मिट जाएंगे।
यह दुखों की जो नदी है, पार इसको करना ही है,
आज जो रोई हैं आँखे, कल उन्हें हँसना भी है।
कर्म के पावन दीये से, तम सारे हट जाएंगे,
रख हौसला, हूँ मैं साथ तेरे, सारे कष्ट मिट जाएंगे।
- अमितेश
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