सुनो, इस विमर्श के शोर में मैं एक मशवरा देता हूँ,
तुम जो कहते हो, "सब मुमकिन है", तुम्हे हकीकत से मिलवाता हूँ,
इस Women's Day, बस एक दिन का किरदार बदल कर देखो,
ज़रा दुनिया इनकी नज़र से, एक बार औरत बन कर तो देखो।
सुबह की पहली किरण से पहले, नींद को त्याग कर देखो,
रसोई की आग में अपनी सारी सुखन बिराग कर देखो,
सबके मनपसंद खाने में अपना स्वाद भूल जाना क्या है,
बिना किसी Thank You की चाह, उम्र भर फर्ज़ संभाल कर देखो।
इस Women's Day, बस एक दिन का किरदार बदल कर देखो,
ज़रा दुनिया इनकी नज़र से, एक बार औरत बन कर तो देखो।
वो जो तुम चौराहों पर बेफिक्री से चलते हो,
मेरी बेबसी का मंज़र उन्ही गलियों में उठा कर तो देखो।
उन हवस भरी नज़रों को अपनी खाल पर महसूस करना,
और फिर अपनी कुंठा, मुट्ठियों में दबा कर तो देखो।
इस Women's Day, बस एक दिन का किरदार बदल कर देखो,
ज़रा दुनिया इनकी नज़र से, एक बार औरत बन कर तो देखो।
सपनों की उड़ान को मर्यादा की ज़ंजीर पहनाना,
पैरहन की लंबाई पर हर रोज़ जिरह सह कर तो देखो।
मायके की याद आए तो चुपके से सिरहाने भिंगोना,
और ससुराल की चौखट पर अपनी पहचान मिटा कर तो देखो।
इस Women's Day, बस एक दिन का किरदार बदल कर देखो,
ज़रा दुनिया इनकी नज़र से, एक बार औरत बन कर तो देखो।
Career की भागम-भाग में दोहरा बोझ उठाना क्या होता है,
बच्चों की सिसकी और office की फाइल में खुद को बाँट कर तो देखो।
दर्द को मुस्कुराहट की ओट में छुपाने का वो हुनर,
तबियत नासाज़ हो तब भी सब का खयाल रख कर तो देखो।
इस Women's Day, बस एक दिन का किरदार बदल कर देखो,
ज़रा दुनिया इनकी नज़र से, एक बार औरत बन कर तो देखो।
तुम्हें लगता है की ये दुनिया बड़ी हसीन है सब के लिए,
जरा बंदिशों के साये में एक सांस भर कर तो देखो।
सम्मान बस एक दिन के फूल और तोहफों में नहीं है,
इनकी रूह का बोझ हर रोज़ अपनी रूह पर धर कर तो देखो।
इस Women's Day, बस एक दिन का किरदार बदल कर देखो,
ज़रा दुनिया इनकी नज़र से, एक बार औरत बन कर तो देखो।
सिर्फ इनका बखान नहीं, इनका संघर्ष चख कर देखो,
मुश्किल है ये होना, बस एक बार औरत बन कर तो देखो।
इस Women's Day, बस एक दिन का किरदार बदल कर देखो,
ज़रा दुनिया इनकी नज़र से, एक बार औरत बन कर तो देखो।
- अमितेश
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें