सोमवार, 2 मार्च 2026

गाँधी जी का डंडा

खादी पहनकर मंचों पर, जो सत्य का राग सुनाते हैं

भीड़ छँटते ही अंधेरों में वो नोटों की रास रचाते हैं 

भूल गए वो सादगी, जो मिला VIP का झंडा है,

याद दिलाओ उन्हें फिर से, ये गाँधी जी का डंडा है। 


धर्मनिरपेक्षता की बात कर, जो नफरत के बीज बोते हैं 

सत्ता की कुर्सी पा कर फिर, चैन की नींद वो सोते हैं 

जनता को आपस में भिड़ाना, बस यही चुनावी फंडा है 

डरना सीखो हमसे सालों, ये गाँधी जी का डंडा है। 


रिश्वत की मेजों के नीचे, फाइले कई दबी पड़ी है 

आम आदमी की ज़िन्दगी, दफ्तरों के चक्कर में मरी पड़ी है 

भ्रष्ट्राचार के साये में जो चलता गंदा धंधा है,

उसे तोड़ने को काफी, गाँधी का ये डंडा है। 


लेफ्ट राइट का चक्कर चला कर, हमको वो भरमा रहे 

हमारी दंगल करा कर फिर, आपस में मौज वो काट रहे

साथ बैठ कर डिनर में फिर वो खा रहे चिकन और अंडा हैं 

समझाओ उन्हें अब, हमारे हाथ में ये गाँधी का डंडा है। 


नारी सम्मान के नाम पर, दीपक जला रहे वो रातों में  

फिर किसी निर्भया, कहीं RG को नोच रहे उजाले में  

दे ताली कर के फिर वो, फैला रहे वितंडा हैं 

संभल जाओ अब भी, यहाँ गाँधी जी का डंडा है। 


- अमितेश 


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