सोमवार, 25 मई 2026

कुत्ता

 वो बात नहीं करता, पर सब समझता है,

एक टुकड़े की खातिर, वो उम्र भर तड़पता है 

इंसान बदल जाते हैं अक्सर मौसम की तरह 

पर ये बेजुबां हर हाल में, अपने मालिक पे मरता है। 


चाहे धूप हो कड़ी, या ठिठुरती हुई सी रात,

वो सोता नहीं जब तक मालिक हो उनके साथ 

उसकी वफ़ा के आगे ताज़ - ओ - तख़्त फीका है 

उसने मुहब्बत में बस निभाना ही सीखा है। 


तुम झिड़क तो उसे, या मारो कोई पत्थर भी,

वो लौट आता है, झुकाये अपना सर फिर भी 

गुस्सा नहीं होता वो, बस आँखे भर आती है,

उसकी खामोश वफ़ाएं, पत्थरों को भी पिघलाती हैं। 


लोग ढूंढते है वफ़ा, ज़माने भर के इंसानों में, 

और खुदा ने उसे रख दिया, इस बेजुबान के सायों में। 


जब दुनिया छोड़ देती है, और साये भी मुँह मोड़ते हैं 

तब भी इसके कदम मालिक को नहीं छोड़ते हैं। 

इश्क़ देखना है तो देखो उस कुत्ते की आँखों में,

जो आखिरी सांस भी लेता, अपनी हमनफ़स की बाहों में। 


- अमितेश  

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