शुक्रवार, 27 मार्च 2026

अच्छा है ना!

भीड़ भरी इस दुनिया में 

कोई अपना सा मिल जाये,

अच्छा है ना!


खामोशी की बातों में भी 

चुपके से जवाब कोई दे जाये,

अच्छा है ना!


कल की उलझने बिसार कर हम 

आंगन की धूप में बैठें 

मिट्टी की सौंधी खुशबू में 

बीते दिन की यादें समेटें। 


बिना किसी मतलब के भी,

एक मुस्कान बिखर जाये,

अच्छा है ना!


आँखों में जो सपने पलते हैं 

हकीकत की उसे रंग दे जायें 

जो बस खयाल थे कल तक 

उन्हें संग अपना दे जायें।  


हार - जीत की इस दौड़ में,

हम खुद ही खुद से जीतें,

अच्छा है ना!


बिना बताये दिल का हाल 

यार कोई समझ जाये,

अच्छा है ना!


जिंदगी की हर उलझन में,

कोई साथ मुस्कुराये 

अच्छा है ना!


 ना कोई औपचारिकता 

ना शब्दों का तोल मोल 

बैठे साथ घंटों तक 

हो हँसी - मज़ाक बेलौस। 


पुरानी यादों के पिटारे से 

वही बचपन निकल जाये 

अच्छा है ना !


दुनिया भले ही रूठे 

पर कंधे पर एक तेरा हाथ हो,

सफ़र चाहे लंबा हो कितना 

एक तू मेरे साथ हो। 


बिन मतलब की इस यारी में 

पूरा जहाँ मिल जाये,

अच्छा है ना!


- अमितेश 


  

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