गुरुवार, 11 जून 2026

फकीरी

बटुआ मेरा नहीं है भारी, ना ही कोई बड़ी दुकान है,

पर दोस्तों की महफ़िल में, मेरी अपनी ही एक शान है।

महल नहीं है रहने को मेरे, ना कोई मखमली लिबास है,

पर जो मिला सुकून से खाया, यही सबसे खास है।

हाँ, है मुझ में खूब अमीरी, सीखा है मैंने इस फकीरी में। 


गाड़ी मेरी कोई बड़ी नहीं, जो सड़कों पर धुआँ उड़ाए,

पर कंधे मेरे यारों के, हर मुश्किल में साथ निभाए।

कपड़ों पर कोई ब्रैंड नहीं, सादगी का ही चोला है,

दिल में कोई बैर नहीं, यह सबसे सीधा-भोला है।

हाँ, है मुझ में खूब अमीरी, सीखा है मैंने इस फकीरी में।


विरासत में नहीं मिली तिजोरी, नाहीं कोई बैंक बैलेंस है,

माँ-बाप के संस्कार हैं, मेरे व्यक्तित्व का एक्सीलेंस है।

अपनों का हाथ है मेरे सर पर, तो हर मुश्किल आसान है,

इन चंद वफ़ादार चेहरों में ही, बसता मेरा सारा जहान है।

हाँ, है मुझ में खूब अमीरी, सीखा है मैंने इस फकीरी में।


दुनिया नापती होगी अमीरी, पैसों और मकानों से,

मैं दौलत अपनी गिनता हूँ, अपनों की मुस्कानों से।

अगर दिल का अमीर होना ही, सबसे बड़ी जागीर है,

तो सुन लो मेरे यारों, मेरी टक्कर का ना कोई फ़कीर है!

हाँ, है मुझ में खूब अमीरी, सीखा है मैंने इस फकीरी में।


- अमितेश 

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