मंगलवार, 22 सितंबर 2026

जब मैं ना रहूंगा

एक मोड़ ऐसा भी आएगा, जब ये शोर थम जाएगा,

हवा में घुला मेरा नाम, धीरे-धीरे धुंधलाएगा।

चिराग बुझेंगे महफिल के, पर चिराग़ों की लौ बोलेगी,

जब-जब मेरी कोई अधूरी तहरीर अलमारी खोलेगी।



कुछ यादों की धूल धुलेगी, कुछ पन्ने फिर से पलटे जाएंगे, 

चाय की उसी चुस्की पर, मेरे चंद पुराने क़िस्से तराशे जाएंगे।

कोई हँसते-हँसते रुक जाएगा, कोई चुपचाप मुस्कुराएगा,

कोने की खाली कुर्सी देख, कोई पल भर को ठिठक जाएगा।


सड़कों पर गाड़ियाँ चलती रहेंगी, शहर वैसे ही जागेगा,

सूरज उसी ढलान से चढ़ेगा, चाँद अपने वक्त पर आएगा।

मौसम अपने रंग बदलेगा, हवाएँ अपना गीत गाएँगी,

दुनिया अपनी रफ़्तार पकड़ेगी, ज़िंदगियाँ फिर पटरी पर आएँगी।


लबों से नाम हटेगा मेरा, पर साँसों में एक नमी रहेगी,

हर महफ़िल के मुकम्मल होने में, बस एक छोटी सी कमी रहेगी।

मैं ज़मीन का हिस्सा बनूँगा, पर हर लफ़्ज़ में बहता रहूँगा,

तुम जब भी तन्हा बैठोगे, मैं हवा बन कुछ कहता रहूँगा।

 

बच्चे अपनी दुनिया की दौड़ में आगे निकल जाएँगे,

नए सपने, नई उलझनों में रोज़ उलझकर ढल जाएँगे।

मेरी बातें उनके लिए बस इक गुज़रा हुआ इतिहास बनेंगी,

कभी-कभार के ज़िक्र में ही बस मेरी कोई याद जगेगी।


रिश्ते-नाते, साथी-संगती अपने कामों में रम जाएँगे,

वक्त की धूल चढ़ेगी मुझ पर, वो अपनी राह बढ़ जाएँगे।

पर उस घर की एक अलमारी में, मेरी तस्वीर के साए में,

एक शख़्स खड़ा होगा तन्हा, बीते लम्हों को समेटे खुद में।


मेरी चाय की खाली प्याली को, वो चुप्पियों से सहलाएगी,

मेरी पुरानी कमीज़ों से, मेरी खुशबू ढूँढ के लाएगी।

ज़माना आगे बढ़ेगा और सब भूलने का ढोंग करेंगे,

वो आँखें चुरा के रोएगी, जब लोग मेरी बातें बंद करेंगे।


दुनिया के लिए मैं एक बीता हुआ सा पन्ना हो जाऊँगा,

पर उसकी हर धड़कन में, मैं खुद को ज़िंदा पाऊँगा।

उसके सन्नाटों की सरगम में, मेरा ही एक तराना होगा,

सब भूल चुके होंगे मुझे, पर उसके लिए मैं ही ज़माना होऊँगा।


हवा जब भी उसके गेसुओं को हौले से सहलाएगी,

वो मुस्कुरा के समझ जाएगी... कि मेरी याद मिलने आई है। 

वो हौले से मुझे महसूस करेगी, मन ही मन मुस्कुराएगी,

उन हवाओं को खुद में समेट, मुझे कस कर गले लगाएगी। 


- अमितेश