मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

द ग्रेट इंडियन सर्कस

सिद्धांतों की चादर को अब खूंटी पे टांग दिया है 

कल जिसे कोसा था, आज उसी का हाथ मांग लिया है 

विचारधारा तो बस अब कपड़ों का एक ब्रांड है 

जिधर सत्ता की मलाई, उधर ही सारा स्टैंड है। 


सुबह जो क्रांतिकारी था, शाम को संस्कारी हो गया 

जादू ऐसा चला कि सारा पाप, गंगा - धारी हो गया 

अब Election नहीं, Selection का दौर है

मंच पर चेहरा कोई और, पर्दे के पीछे कोई और है। 


सड़क में गड्ढा है या गड्ढे में सड़क, ये पता नहीं 

पर होर्डिंग पर नेता जी की मुस्कान में कोई खता नहीं 

GDP गिरे या बढे, पर IT Cell का ग्राफ ऊंचा है 

सच्चाई पूछने वाले के पास, अब सिर्फ एक ही कूचा है। 


जाति का चश्मा पहन कर, वो वोट की फसल काटते हैं 

मुफ्त की रेवड़ियों में, वो जनता की अक्ल बांटते हैं 

मुद्दे गायब हैं - बेरोजगारी, शिक्षा और थाली से,

अब बहस शुरू होती है गाली से, और खत्म ताली से!


जनता बेचारी आज भी 'अच्छे दिनों की कतार में है 

और नेता जी अपनी अगली flight और सरकार में हैं 

लोकतंत्र का मंदिर अब एक भव्य शोरूम जैसा है,

यहाँ जीतता वही है, जिसकी पॉकेट में पैसा है। 


- अमितेश 

 

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